शुक्रवार, 18 जून 2010

है बात बड़ी सीधी सी मगर.......................

है बात बड़ी सीधी सी मगर कुछ लोग न जाने कब समझें |
हर बात में कुछ तो बात छुपी ये बात न जाने कब समझें ||

हर रिश्ते के पीछे सौदा हर रिश्ता ही अब सौदा है |
हर इन्सां कितना बदल गया ये बात न जाने कब समझें ||

मेहनत किस्मत की बातों में न जाने कब से उलझे हो |
किस्मत के पीछे मेहनत है ये बात न जाने कब समझें ||

सब लोग पराये लगते है दिल में बोये कितने कांटे |
हर रिश्ता है पहचान नई ये बात न जाने कब समझें ||

लोगों को मिलने जुलने का बस एक बहाना काफी है |
तेरे प्यार में इतनी कशिस तो हो ये बात न जाने कब समझें |

6 टिप्‍पणियां:

  1. हर रिश्ते के पीछे सौदा हर रिश्ता ही अब सौदा है |

    Bahut khub.

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  2. लोगों को मिलने जुलने का बस एक बहाना काफी है |
    तेरे प्यार में इतनी कशिस तो हो ये बात न जाने कब समझें

    bahut hi sundar .badhai!

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  3. मेहनत किस्मत की बातों में न जाने कब से उलझे हो |
    किस्मत के पीछे मेहनत है ये बात न जाने कब समझें ||

    बहुत खूब ... सच कहा है ...

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  4. सिंह साहब ! एक गंभीर विषय को बहुत अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया है. धन्यवाद.

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  5. मेहनत किस्मत की बातों में न जाने कब से उलझे हो |
    किस्मत के पीछे मेहनत है ये बात न जाने कब समझें ||


    bahut khoob ji.....

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