शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

मेरा सपना मुझे मिलगया..............

तुम जो मिले मुझको एसा लगा
मेरा सपना मुझे मिलगया.......
बात कहनी थी जो वो भी कह ना सके
चाँद घूँघट में जा छिप गया
तेरी आँखों में है मय की जादूगरी
उम्र भर मैंने तेरी परतिश करी
आए तुम जो लगा कि बहार आगई
मेरा खोया सजन मिलगया
मेरा सपना मुझे मिलगया ..........
तुम जो मिले मुझको एसा लगा
मेरा सपना मुझे मिलगया .........
फूलों से नाजुक है चेहरा तेरा
घिरती जुल्फों में उलझा है ये मन मेरा
ये हकीकत नहीं कोई सपना लगे
कोई हम दम मेरा बन गया ...
मेरा सपना मुझे मिलगया .........
तुम जो मिले मुझको एसा लगा
मेरा सपना मुझे मिलगया

5 टिप्‍पणियां:

  1. गीत बहुत मधुर, गेय, लयबद्ध, चंद्बद्ध और दिल को चुने वाला है....जीते रहो. इस गीत को पढ़ कर दोस्त किशन सरोज की याद आ गयी
    , जो बहुत बड़े गीतकार हैं और उनके गीतों में भी यही गंध आती है. जल्दी जल्दी लिखते रहा करो......
    तेरी आँखों में है मय की जादूगरी
    उम्र भर मैंने तेरी परतिश ( शायद यहाँ परश्तिस लिखा जायेगा) करी
    आए तुम जो लगा कि बहार आगई
    मेरा खोया सजन मिल गया
    मेरा सपना मुझे मिल गया ..........
    वाह....वाह....! ९अप्रैल को तुम्हारे गीत नुमाइश के मंच पर सुने जायेंगे.

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  2. सबसे पहले परतिश को परस्तिश लिखवाना चाहूँगा.
    गीत बहुत मधुर,मार्मिक और कर्णप्रिय है, पढ़ते हुए दिमाग भी मचल रहा था.
    लेकिन...अभी और...बल्कि बहुत मेहनत की जरूरत है.
    तुम सहमत हो ना!!

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  3. Atee sundar geet..umar bhar ke intezaar ke baad sajan mil gaya ..aur kya chahiye..

    उम्र भर मैंने तेरी परतिश करी
    आए तुम जो लगा कि बहार आगई
    मेरा खोया सजन मिलगया
    मेरा सपना मुझे मिलगया ..........

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  4. उम्र भर मैंने तेरी परतिश करी
    आए तुम जो लगा कि बहार आगई
    मेरा खोया सजन मिलगया
    मेरा सपना मुझे मिलगया ..........
    bahut sundar.psingh ji aapka sapna zaroor poora hona bhi chahiye itni sundar bhavabhiyakti jo hai.

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