मंगलवार, 11 अक्तूबर 2011

सागर में पानी है जितना

प्यार करेंगे तुमको इतना

सागर में पानी है जितना

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दिल के दरवाजे पर

दोगे दस्तक कब

लोग कहें पागल

दीवाना मुझको अब

मै तो चाहूँ दिल में तेरे घर अपना

सागर में पानी है जितना

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दिन कट जाता है

मिलने की आस लिए

रात नहीं कटती

बिरहा का घूंट पिए

न जाने कब पूरा हो मेरा सपना

सागर में पानी है जितना

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साँस साँस पर नाम

तुम्हारा रटते है

तेरे नाम से सजाते

और संवरते है

दिल चाहे तेरे चरणों में मिटना

सागर में पानी है जितना

मिलेंगे तुमसे एसे

ना हों दूर कभी

सागर में मिलती है

जैसे बिछड़ी नदी

तुम ना हमसे शर्मना

सागर में पानी है जितना


1 टिप्पणी:

  1. प्यारे बच्चे
    बड़ी देर बाद आई यह प्रस्तुति आई मगर बहुत अच्छी है.... गीत युगल है... मन को ताजगी देता है...आखरी बंद अच्छा बन पड़ा है
    साँस साँस पर नाम

    तुम्हारा रटते है

    तेरे नाम से सजाते

    और संवरते है

    दिल चाहे तेरे चरणों में मिटना

    सागर में पानी है जितना

    मिलेंगे तुमसे एसे

    ना हों दूर कभी

    सागर में मिलती है

    जैसे बिछड़ी नदी

    तुम ना हमसे शर्मना

    सागर में पानी है जितना

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